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समाज का ध्वज / Community Flag


अनादि काल से ही किसी भी राष्ट्र और समाज की पहचान उसके झंडे से होती चली आ रही है। महाभारत युद्ध के समय भी योद्धाओं की पहचान पताका (झंडे) से ही होती थी। इसी को ध्यान में रखकर सेकड़ों उपनामों, उपजातियों और उपवर्गों में बँट चुके कलवार, कलाल व कलार समाज को संगठित और इसकी प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने हेतु समाज के झंडा का निर्माण किया गया है। इसके निर्माण में विभिन्न बुद्धिजीवियों, विचारक व समाजसेवी का सहयोग लिया गया है। झंडा के प्रारूप को तय करने में “उद्गम, कुलदेवता, विचारधारा व उज्जवल भविष्य की परिकल्पना" को ध्यान में रखा गया है। मुख्य बातें:-
  1. इसका आकार / अनुपात भारतीय तिरंगे की तरह 3:2 (लंबाई : चौड़ाई) है।
  2. इसमें तीन रंग (केसरिया, सफ़ेद व लाल) की क्षैतिज तीन पट्टियाँ एक सामान हैं और मध्य पट्टी में कुलदेवता और समाज के प्रतीक चिन्हों को समाहित किया गया है।
  3. केसरिया रंग:- हमारे कुलदेवता श्री सहस्त्रार्जुन जी का मुख्य वस्त्र का रंग है साथ ही यह हमें सनातन धर्म की विशेषता का भी स्मरण कराता है।
  4. सफ़ेद रंग:- यह शांति, सद्भाव, एकता व समाज द्वारा स्वच्छ आचरण पर विश्वास करने का प्रतीक है। सफ़ेद रंग हमारी उत्तम संस्कृति व सभ्यता का भी बोध कराता है।
  5. लाल रंग:- कलवार, कलाल व कलार समाज, कलचुरि राजवंश के वंशज हैं और वृहत्तर भारत पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला राजवंश है। कलचुरि राजवंश के शासकीय झंडे का मूल रंग लाल ही था। अतः यह लाल रंग हमारे उद्गम और गौरवशाली अतीत का बोध कराता है। लाल रंग नई ऊर्जा और शक्ति का भी घोतक है।
  6. सफ़ेद पट्टी पर तीर-धनुष व हल का चिन्ह:- तीर-धनुष हमारे कुलदेवता श्री सहस्त्रार्जुन जी का मुख्य शस्त्र है जबकि कुलदेवता श्री बलभद्र जी का अस्त्र हल है। यह नीले रंग से बना है जिसका अर्थ यह है कि जिस तरह आकाश का रंग नीला है और यह ऊंचाई और भव्यता का प्रतीक है, उसी तरह हमारा समाज भी नित नई उंचाईं और भव्यता को प्राप्त करे। इसके साथ ही श्री बलभद्र जी को नीलाम्बर भी कहते हैं, इसलिए नीले रंग का चुनाव किया गया।
  7. उद्देश्य:- हम स्वजातियों के बीच कई संस्थाए कार्यरत हैं जिसमे से कुछ उपजाति पर आधारित हैं तो कुछ राजवंश के नाम पर और कुछ वर्ण व्यवस्था पर। इस झंडे के द्वारा सभी स्वजातीय संस्था को एक छत के नीचे लाना और समाज की पहचान कायम करना।
  8. निवेदन:- सभी स्वजातीय बंधू से यह अपेक्षा की जाती है कि चाहे किसी भी प्रदेश के हो या किसी भी संस्था से जुड़े हों अपने घर/ प्रतिष्ठान/ वाहन पर इस झंडे को अवश्य लगायें।